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ED का फर्जी पत्र, फिर भी न ईडी का पुलिस एक्शन, न MP गर्वनमेंट करा रही FIR

मध्य प्रदेश शासन को इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) के नाम पर किसी व्यक्ति ने फर्जी पत्र भेजकर ऐसा चमकाया कि अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। कुछ महीने पहले जब मध्य प्रदेश शासन को ईडी के नाम पर भेजे गए पत्र के फर्जी होने का तथ्य पता चला तो एक महीने बीतने के बाद भी अब तक राज्य शासन की ओर से पुलिस एक्शन लिया गया है। न ही ईडी ने अपने नाम का दुरुपयोग कर किसी राज्य शासन को भ्रमित करने के मामले में किसी तरह की कार्रवाई की है। इससे प्रशासनिक गलियारों में संदेह व्यक्त किया जाने लगा कि कहीं इसमें मध्य प्रदेश शासन के अधिकारियों की तो यह करतूत नहीं है जो पुलिस एक्शन निर्णय लेने में अहम भूमिका रखते हैं और पुलिस एक्शन होने पर सब सच सामने आने से भयभीत हों। आईए बताते हैं क्या है मामला।

कूनो की चीता दक्षा की मौत पर राजनीति, अखिलेश यादव ने जानवरों पर क्रूरता का मामला बताया

नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 चीतों में से तीन चीतों की मौत हो चुकी है जिनमें से दक्षा की मौत नर चीतों से मिलाने की कोशिशों के दौरान हुई है। अब इन मौतों पर राजनीति शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दक्षा की मौत के बाद इन्हें जानवरों की क्रूरता का मामला बताते हुए दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर दी है। आईए जानते हैं यादव ने क्या कहा।

दीपक की आड़ में सिंधिया-शिवराज-वीडी BJP नेताओं के निशाने पर, चुनाव पहले चुनौतियां बढ़ीं

मध्य प्रदेश में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के वे नेता मुखर हो गए हैं जो कुछ सालों से अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे थे। दीपक जोशी की आड़ में ये नेता अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को निशाने पर लेने से नहीं चूक रहे हैं। दीपक जोशी तो पार्टी छोड़ रहे हैं तो उनकी बात अब उतने मायने नहीं रखती लेकिन पार्टी में मौजूद दूसरे उपेक्षित भाव महसूस करने वाले नेताओं के बयानों से भाजपा की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पढ़िये भाजपा के भीतर की ऊहापोह की स्थिति पर रिपोर्ट।

कर्नाटक के चुनावी वादे ने MP में भड़के बजरंग दल कार्यकर्ताओं से CISF सुरक्षा मांगी, शाह को नेता प्रतिपक्ष का पत्र

बजरंग दल को लेकर कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में जो वादा किया है, उससे कर्नाटक में तो कांग्रेस पर बजरंग बली के अपमान के आरोप लग रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने जिस तरह तोड़फोड़ की, उससे कांग्रेस दफ्तरों में असुरक्षा का माहौल है। अब कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार से अपने कार्यालयों की सीआईएसएफ सुरक्षा की मांग कर दी है।

BJP ने दीपक जोशी मामले में देरी की, अब भंवरसिंह शेखावत पर कांग्रेस की नजर

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के पहले राजनीतिक दलों के असंतुष्टों पर कांग्रेस-भाजपा की नजरें जमी हैं और ऐसे लोगों को समय के अंतराल से भुनाने में दोनों ही दल जुटे हैं। अभी तक कांग्रेस ने इस रेस में बढ़त बनाकर रखी है। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी के मामले में भाजपा जो देरी की है, वह कुछ अन्य नेताओं के मामले में पार्टी को भारी पड़ सकती है। जोशी को मनाने का क्रम अभी भी चल रहा है लेकिन आज के हालात को देखकर लगता है कि भाजपा ने इसमें बहुत देरी कर दी है।

कर्नाटक के कांग्रेस घोषणा पत्र पर MP में राजनीति, बजरंग दल बनाम PFI

कर्नाटक विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है और वहां के कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है कि वे अपने आपको हनुमानभक्त कहते हैं तो कर्नाटक में कांग्रेस बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाए जाने पर अपना मत स्पष्ट करें। क्या वे भगवान हनुमान जी को ताले में बंद करने से सहमत हैं।

CG में पदस्थापना नींद उड़ी MP के अफसरों कीः सात सीनियर अफसर नजरअंदाज APCCF को बनाया वन बल प्रमुख

मध्य प्रदेश से अलग हुए छत्तीसगढ़ के जंगल में एक अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक की प्रभारी वन बल प्रमुख के पद पर पदस्थापना से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आईएफएस अफसरों के आंखों की नींद उड़ गई है। दोनों राज्यों के जंगल महकमे के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि वन बल प्रमुख के सेवानिवृत्त होने पर किसी एपीसीसीएफ को विभाग के मुखिया का प्रभार दिया गया हो। छत्तीसगढ़ में 7 सीनियर पीसीसीएफ स्तर के अफसरों को सुपरशीट करते हुए एपीसीसीएफ श्रीनिवास राव को वन बल प्रमुख की कुर्सी पर बैठा दिया गया है। छत्तीसगढ़ में हुई पदस्थापना को लेकर मध्यप्रदेश में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या यहां भी वन बल प्रमुख की पदस्थापना में बदलाव हो सकता है?

BJP में पुराने नेताओं का अस्तित्व दांव पर तो नहीं, साय के बाद दीपक जोशी क्या फिर और भी…?

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं तो दलबदल से नेता इधर से उधर जाने के लिए सुर्खियों में आने लगे हैं। संगठन के नाम पर मजबूत मानी जाने वाली भाजपा पार्टी में इस समय पुराने नेताओं को अपने अस्तित्व की चिंता सता रही है। अविभाजित मध्य प्रदेश के नेता से लेकर जन्मजात आरएसएस विचारधारा वाले नेता पार्टी में कुंठित महसूस कर रहे हैं। चुनाव पूर्व मची यह आपाधापी सुर्खियां बटोर रहे नेताओं तक सीमित रहेगी या आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा, यह सवाल अब तेजी से लोगों के दिमाग में कौंधने लगा है। पढ़िये इस पर हमारी रिपोर्ट।

यादों के झरोखे: ऑपरेशन ब्लू स्टार में बादल को पचमढ़ी में नजरबंद किया गया था

पंजाब के जाने-माने राजनेता प्रकाश सिंह बादल का कल निधन हो गया उनकी मध्यप्रदेश से जुड़ी कुछ यादों को हमारे साथ भोपाल के डॉक्टर आलोक गुप्ता ने शेयर किया है. बादल यहां क्यों आए थे और किस कारण उन्हें यहां लाया गया था जानिए इस रिपोर्ट में.

पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान वहां के कई नेताओं को नजरबंद किया गया था जिनमें प्रकाश सिंह बादल भी शामिल थे. उन्हें पंजाब या देश के अन्य किसी राज्य में नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में नजरबंद किया गया था. उनके साथ मध्यप्रदेश में सुरजीत सिंह बरनाला को भी नजर बंद करने के लिए लाया गया था. इन दोनों नेताओं को मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल पचमढ़ी में रखा गया था जिनकी चिकित्सक की देखरेख के लिए भोपाल के डॉक्टर आलोक गुप्ता की ड्यूटी लगी थीथी.

डॉ गुप्ता विशेष वाहन से पचमढ़ी गए थे

बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि अमृतसर में जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार उपरान्त पंजाब की राजनीति के शिखर पुरुष प्रकाश सिंह बादल एवम सुरजीत सिंह बरनाला को मध्यप्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में कढ़े सुरक्षा प्रबन्ध में नज़रबन्द रखा गया था। यही नहीं, उन दोनों के मेडिकल परीक्षण हेतु भोपाल से गांधी मेडिकल कॉलेज व हमीदिया अस्पताल में कार्यरत डॉ आलोक गुप्ता को विशेष आदेश व वाहन द्वारा भेजा गया था।

कपिल सिब्बल ने दिल्ली में पार्टी छोड़ी, MP में कांग्रेस नेता का साथ नहीं, जानें कैसे

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सीनियर हाईकमान के कार्यक्रमों को दूसरे दर्जे पर रखता है और उसी तरह पार्टी से नाता तोड़ने वाले एमपी से दूर के नेताओं को गोद में बैठा रहा है, वह पार्टी लाइन से हटकर है। ताजा उदाहरण इंदौर में वकीलों के एक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य के साथ जिस तरह पार्टी के नेता खड़े नजर आ रहे हैं, वह इसका संकेत दे रहे हैं। पढ़िये हमारी रिपोर्ट।

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