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पू्र्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन, देशभर में शोक की लहर
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का एम्स दिल्ली में रात को निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। वे दस साल भारत के प्रधानमंत्री रहे और वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने आर्थिक सुधारों के लिए जो काम किया उसके लिए देश कभी भूल नहीं पाएगा।
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के गाह गांव में हुआ था और पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद वे कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा कर लौटे। प्रशासनिक सेवाएं देते हुए वे रिजर्व बैंक के गर्वनर भी रहे। इसके बाद सेवानिवृत्ति पश्चात उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की सरकार में योजना आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर शुरुआत की और फिर वे 1991 में नरसिंह राव की सरकार में वित्त मंत्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए देश में आर्थिक सुधारों के लिए काफी काम किया। आयात-निर्यात को सरल बनाया और लायसेंस-परमिट की आवश्यकता को समाप्त करते हुए निजी पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री रहते हुए सूचना क्रांति, मनरेगा, किसान कर्जमाफी, शिक्षा का अधिकार जैसे कदम उठाए।
दो घंटे एम्स में भर्ती रहे
डॉ. मनमोहन सिंह की गुरुवार की रात आठ बजकर छह मिनिट पर घर पर तबियत खराब हुई थी और एम्स दिल्ली की मेडिकल डॉक्टरों की टीम उनके घर पहुंची। मगर स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आने की वजह से उन्हें तुरंत एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया। वहां रात नौ बजकर 51 मिनिट पर सिंह ने अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार सुनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा-कांग्रेस के तमाम नेताओं ने उनके निधन को देश के लिए अपूर्णीय क्षति बताया।




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