मध्य प्रदेश का इंदौर ही नहीं, भोपाल हो या अन्य शहर, वहां पीने के पानी की पाइप लाइनों को बिछाते समय जमीनी स्तर पर काम का निरीक्षण नहीं होता और पाइप लाइन गंदे नाले व नालियों के भीतर से निकाल दी जाती हैं। नई पाइप लाइन तो गंदे पानी में भी लोगों को अच्छा पीने लायक पानी पहुंचा देती है मगर जब एक दो बार लीकेज होता है तो गंदे नाले और नाली की गंदगी पीने के पाइप लाइन में पहुंच जाती है। ऐसे में इंदौर के भागीरथपुरा से हादसे हो जाते हैं जिनकी गूंज दूसरे किसी बड़ी घटना के होने तक ही जिम्मेदारों को सुनाई देती है और फिर पुराने ढर्रे पर जिम्मेदार चलने लगते हैं। पढ़िये रिपोर्ट।
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