मध्य प्रदेश में 70 ओर 80 के दशक में डकैत समस्या चरम पर थी और उसी दौरान युवा आईपीएस राजेंद्र चतुर्वेदी ने कुख्यात डाकुओं मलखान सिंह, फूलन देवी, घंसा बाबा का आत्मसमर्पण कराकर खूब वाहवाही लूटी थी। सेवा के दौरान डकैतों के आत्मसमर्पण के अलावा उन्होंने काफी उतार चढ़ाव का समय देखा और आखिरी में वे जेल डीजी के रूप में भर्तियों की गड़बड़ी में फंसे तो जेल तक की सजा हुई। आखिर आखिर में पारिवारिक झगड़ें में उनकी चर्चा होती रही। हालांकि कुछ दिन पहले उनका गुमनामी के बीच रांची में निधन हो गया। पढ़िये रिपोर्ट।
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