मध्य प्रदेश कांग्रेस में 2018 के विधानसभा चुनाव के छह महीने पहले मई में अरुण यादव को हटाकर कमलनाथ को कमान सौंपी गई थी। 15 साल से राज्य में सत्ता से बाहर पार्टी का खजाना खाली था और उसके लिए कमलनाथ को जिम्मेदारी दी गई थी जिसके लिए उन्होंने संगठन खड़ा करने और चुनाव के लिए सर्वे के नाम पर कार्यकर्ताओं पर चलो-चलो का डंडा चलाया था। चंद नेताओं से संवाद करके प्रदेश में पार्टी चलाने की उनकी रणनीति में न संगठन बचास न ही जमीनस्तर पर प्रत्याशी चयन के लिए सर्वे हुआ जिसका नतीजा 2023 में कांग्रेस 2003 की स्थिति में आकर खड़ी हो गई है। पढ़िये मध्य प्रदेश में कांग्रेस के डेढ़ दशक के संगठन पर रिपोर्ट।
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