एकात्म वह इकाई है, जिसे बांटा नहीं जा सकता। मानवता का विकास एकात्मता से होता है। पश्चिमी संस्कृति मात्र चार सौ साल पुरानी है। इसलिए हमें एकात्म मानववाद का अपना दर्शन अपनाना चाहिए। एकात्म मानववाद ही भाजपा का मूल दर्शन है। व्यक्ति और समाज अलग नहीं हैं। उनकी एकात्मता व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि में निहित है।
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