मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के 229 प्रत्याशियों का चयन हो तो गया मगर इसके पीछे दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस की त्रिमूर्ति यानी कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और गोविंद सिंह के बीच चर्चा के नाम पर कई बार बहस हुई। इसके बाद भी चेहरे, अपने-तुम्हरे नामों को फाइनल कर दिया गया और कई टिकट तो जमीनी फीडबैक के बिना दे दिए जाने से विपरीत हालात बने और उन्हें बदले जाने से पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं में गलत संदेश पहुंचा। इसका नतीजा यह हुआ कि पहली सूची के मुकाबले दूसरी सूची से असंतोष के स्वर ज्यादा तेजी से सामने आए। पढ़िये रिपोर्ट।
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