राजनेताओं के पास अपनी बात को अपनी जनता, कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए शब्दकोष इतना सिमटता जा रहा है कि मंच से सामने बैठे लोगों को अपना संदेश पहुंचाने के लिए उचित शब्द का चयन भी नहीं कर पाते हैं। कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ हुई एफआईआर के खिलाफ न्याय सत्याग्रह आयोजित किया था जिसमें कार्यकर्ताओं-नेताओं के साथ माननीयों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया मगर यहां मध्य प्रदेश के बड़े शहर ग्वालियर का प्रतिनिधित्व करने वाले एक माननीय का संबोधन ऐसा रहा कि आंदोलन का जो न्याय सत्याग्रह नाम दिया गया था, वह निरर्थक साबित हो गया। थर्ड जेंडर को जिस अंदाज में अपमानजनक ढंग से संबोधित किया गया, वह न्याय सत्याग्रह की भाषा तो कतई नहीं मानी जा सकती है। पढ़िये रिपोर्ट।
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