नवरात्रि की दूसरी महाशक्ति को अद्भुत तपस्या के कारण ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा जाता है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या का चरम बिन्दु और चारिणी को आचरण करने वाली के रूप में समझा जाता है। कुल मिलाकर तपस्या के अनुशासन को चरम सीमा तक आचरण में उतारने वाली मां को ब्रह्मचारिणी कहते हैं। इस प्रकार विश्वास, एकाग्रता और लक्ष्यनिष्ठ होकर आज के दिन साधना करना चाहिए।
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