दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में जात-पात के भेद ने एक मासूम की बलि ले ली। घटना जिले के तेदूखेड़ा के खमरियाकलां गांव की है। यहां प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा तीसरी के एक छात्र को स्कूल के हैंडपंप पर पानी पीने से रोका गया, तो वह स्कूल के पास ही बने एक कुंए पर जा पहुंचा, लेकिन बाटल में रस्सी बांधकर पानी निकालते समय कुंए में गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। घटना की सूचना मिलने पर खमरियाकलां गांव पहुंचे जनपद सीईओ ने पूरे स्कूल स्टाफ को निलंबित कर दिया।
उन्होंने बताया कि इस स्कूल के हेड मास्टर सहित पांच शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय तथा कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं सीईओ जनपद पंचायत दमोह से एक माह में जवाब मांगा है।
कोरोना के कारण मुश्किल से खुले स्कूल और बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे वाहन चालक
आरटीओ झाबुआ तीन सप्ताह में दें जवाब
झाबुआ जिले में कोरोना के नियंत्रण में आने के बाद से मुश्किल से स्कूल खुले हैं और वाहन चालक स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें वाहन की छत पर बिठाकर आवागमन कर रहे हैं। जिले के ग्राम बावड़ी बड़ी से पिटौल की ओर जा रहे स्कूली वाहन की आवागमन क्षमता मात्र 10 बच्चों की है, परन्तु इसमें 30 से अधिक बच्चों को बिठाकर ले जाया जा रहा था। स्कूली बच्चों को वाहन के उपर व पीछे लटकाकर वाहन चालक इन बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने जिला परिवहन अधिकारी (आरटीओ), झाबुआ से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। आयोग ने आरटीओ से यह भी पूछा है कि इस तरह के वाहनों पर किस प्रकार नियंत्रण किया जा रहा है ?
आयोग मेें मामला आने पर श्रीमती जानकी को मिला मानदेयमध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में मामला आने पर जिला पंचायत सिवनी में स्वच्छ भारत मिशन की जिला समन्वयक श्रीमती जानकी कौशले को मानदेय मिल गया है। शिकायत का निवारण होने पर आयोग में यह मामला अब नस्तीबद्ध कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि श्रीमती जानकी कौशले द्वारा नवम्बर, 2019 में आयोग को एक आवेदन दिया गया जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि उन्हें मार्च, 2019 से सितम्बर, 2019 तक का मानदेय नहीं दिया गया है। शिकायत मिलने पर आयोग द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, सिवनी से प्रतिवेदन मांगा गया। आयोग द्वारा मामले की निरंतर सुनवाई की गई। जिसपर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, सिवनी ने 24 अगस्त, 2021 को आयोग को प्रतिवेदन दिया है कि श्रीमती जानकी कौशले को मार्च, 2019 से सितम्बर, 2019 तक का मानदेय भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान में इनका कोई भुगतान लंबित नहीं हैं। आवेदिका ने भी अपना संतुष्टि पत्र आयोग को भेज दिया है कि उन्हें मानदेय मिल चुका है और उन्हें अब किसी भी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है।








