मध्य प्रदेश में अब दस महीने का वक्त विधानसभा चुनाव का बचा है लेकिन अभी भी भाजपा-कांग्रेस में मौजूदा विधायकों में से ज्यादातर ऊहापोह की स्थिति में है क्योंकि ऐसे एमएलए ने विधायक बनने या मंत्री बनने के बाद जमीन छोड़ दी थी। ऐसे लोग या तो क्षेत्र में होने के बाद भी अपने लोगों से ही घिरे रहे या फिर क्षेत्र के विकास की तरफ उन्होंने वैसा ध्यान नहीं दिया जिसकी लोगों को उनसे उम्मीद थी। यही वजह से आज शिवराज मंत्रिमंडल के 40 फीसदी तो कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे 60 फीसदी विधायक आज चुनाव हो जाएं तो उनकी हार को सुनिश्चित माना जा रहा है।
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