मध्य प्रदेश के वन विभाग में आईएफएस अधिकारियों के चेहरे देखकर एक्शन लिए जाते हैं जिसके विभाग में कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। सीधी भर्ती के अफसरों को जिस मामले में शो-कॉज नोटिस देकर किसी अनुशासनहीनता या गड़बड़ी से बरी कर दिया जाता है तो उसी तरह के कृत्य पर प्रमोटी अधिकारियों को न केवल निलंबित करने के उदाहरण हैं बल्कि उन अफसरों के जवाब के बाद भी विभाग निर्णय लेने में टालमटोल रवैया अपनाता है। इसके कारण उनमें इंफेरिआरिटी कॉम्प्लेक्स की भावना के बीज अंकुरित होने लगे है। हमारी रिपोर्ट में विभाग की सीधी भर्ती के आईएफएस व प्रमोटी अधिकारियों के साथ किए गए भेदभावपूर्ण व्यवहार के कुछ मामलों को रखा जा रहा है।
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