देश के मान्यता प्राप्त 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठन, केंद्र, राज्य, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, रक्षा उद्योगों समेत तमाम औद्योगिक महासंघ विगत लंबे समय से संयुक्त रूप से आंदोलन कर रहे है। वर्तमान केंद्र सरकार को कई पत्र और ज्ञापन दिए जाने के बावजूद ट्रेड यूनियनों से उनकी मांगों पर सरकार द्वारा कोई चर्चा तक नहीं की जा रही है। अपितु बगैर उचित चर्चा के, कोरोना काल का सहारा लेकर श्रम कानूनों को एकतरफा तौर पर समाप्त कर श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिक विरोधी कई प्रावधान थोप दिए गए है। ठीक इसी तरह बगैर किसान संगठनों से चर्चा के तीन कृषि विरोधी कानूनों को उनपर थोप दिया गया है।
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