प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी जन औषधि परियोजना का मध्य प्रदेश में मखौल उड़ाया गया और जब इसकी एफआईआर दर्ज हो गई तो पुलिस ने भी मामले की जांच गंभीरता से नहीं की। जब मामला रफा-दफा करने के लिए कोर्ट तक पहुंचा तो अदालत ने ऐसा आदेश दिया है कि अब पुलिस की विवेचना पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जन औषधि संघ मप्र नाम की संस्था के पंजीयन, उसकी गतिविधियों पर इस रिपोर्ट में फोकस किया जा रहा है, पढ़िये क्या है मामला।
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