मध्य प्रदेश में बारह साल पहले जिस तरह पुलिस का खुफिया तंत्र फेल साबित हुआ था, लगभग वही हालात फिर भोपाल में पैदा हुए हैं। मध्य प्रदेश पुलिस की खुफिया शाखा के कामकाज से सीएम भी संतुष्ट नहीं थे जिसका इजहार उन्होंने एक सप्ताह पहले ही किया था लेकिन इसके बाद भी करणी सेना के ऐसे आंदोलन की सूचना में वह एकबार फिर नाकाम रही है। संख्या का अंदाज नहीं लगा पाने की वजह से आंदोलन की अनुमति को लेकर प्रशासन व पुलिस के अधिकारी भी असमंजस में रहे। अब यह भीड़ पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन चुकी है।
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