मध्यप्रदेश के ज्यादातर सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों की मान्यता खतरे में पड़ गई है। इन कॉलेजों के पास स्टूडेंट्स तो हैं लेकिन पढ़ाने के लिए फैकल्टी नहीं है। फैकल्टी की कमी की वजह से बुरहानपुर, रीवा, जबलपुर की स्नातक की मान्यता और उज्जैन की द्रव्यगुण रचना, पीजी की मान्यता निरस्त हो गई है। इंदौर शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को सशर्त मान्यता दी गई है जबकि खुशीलाल आयुर्वेदिक कॉलेज की पीजी की मान्यता खतरे में है।
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