देश के आजाद होने के बाद से 1967 तक एक राष्ट्र-एक चुनाव होते रहे लेकिन इसके बाद विधानसभाओं और लोकसभा के समय पूर्व भंग होने से यह सिस्टम बिगड़ता गया। आज हर साल चुनाव हो रहे हैं जबकि आजाद भारत के पहले लोकसभा-विधानसभा चुनावों के लिए साक्षरता कम होने की वजह से हर प्रत्याशी की एक मतपेटी से चुनाव कराए गए थे। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस ओपी रावत हमें बता रहे हैं एक राष्ट्र-एक चुनाव के लिए क्या करना होगा और कब-कब क्या हुआ।
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