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सेना पर सवाल उठाने पर दिग्विजय पार्टी में अलग-थलग पड़े, यात्रा के दौरान दूसरी बार बने ऐसे हालात
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के सूत्रधारों में से एक माने जा रहे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह यात्रा के दौरान दूसरी बार पार्टी में अलग-थलग दिखाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से संबंधों में खटास आई थी और भारत जोड़ो यात्रा से उन्हें हाईकमान के करीब पहुंचने का मौका मिला था। मगर संवेदनशील मामलों में विवादास्पद बयान देने की पहचान बना चुके दिग्विजय के लिए इस बार फिर विपरीत परिस्थितियां पैदा बनती नजर आ रही हैं। पढ़िये खास रिपोर्ट।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 2018 के पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में महासचिव के दायित्वों से एक-एक मुक्त होते गए थे और जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे तो उनकी तब हाईकमान के नजदीकी माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्य में सशक्त होने से रोकने के लिए कमलनाथ के साथ रिश्ते मजबूत बनाए। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जिला-ब्लॉक स्तर पर अपने संपर्कों के माध्यम से संगठन को मजबूत बनाने का काम किया। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से नाराज नेताओं को मानने के लिए पंगत में संगत के आयोजन किए। जब प्रदेश में सरकार बन गई तो सिंधिया को फिर कमजोर करने की रणनीति पर काम करते हुए उनके समर्थक मंत्रियों व विधायकों के लिए विपरीत परिस्थितियां बनाते रहे। सिंधिया और उनके समर्थकों सहित कांग्रेस के 22 विधायकों ने दल बदल कर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिरा दिया और शिवराज सरकार फिर बन गई। उस दौरान कोविड काल होने से करीब दो साल तक राजनीतिक गतिविधियां कमलनाथ के बंगले से संचालित होती रहीं जो आज भी कुछ समय पहले तक चलाई जा रही थीं।
कमलनाथ-दिग्विजय के संबंध में खटास
सरकार के गिरने के बाद कमलनाथ-दिग्विजय सिंह के संबंधों में खटास आती रही। कुछेक मर्तबा इन नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों से इसका खुलासा भी हुआ। कमलनाथ ने सरकार गिरने के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में यह स्वीकार भी किया था कि दिग्विजय सिंह ने उन्हें अंधेरे में रखा। हालांकि बाद में और अब वे यह भी कहते रहते हैं कि उन्हें पता था कि विधायकों को खरीदे जाने की कोशिश की जा रही है। वे विधायकों का नाम नहीं लेते लेकिन यह टिप्पणी करते रहते हैं कि जिन विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही थी, वे उन्हें आकर पैसों के प्रलोभन की बातें बताते थे। फऱवरी-मार्च 2020 के महीनों के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर दिग्विजय सिंह ने मोर्चा संभाला था और सरकार गिरने के बाद कमलनाथ को दिग्विजय सिंह द्वारा सही स्थिति नहीं बताए जाने की शिकायत रही।
भारत जोड़ो यात्रा से फिर दिग्विजय को मौका मिला
दिग्विजय सिंह को 2018 के पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दायित्वों से धीरे-धीरे मुक्त किए जाने और 2020 के बाद प्रदेश में सरकार गिरने के बाद कमलनाथ से संबंधों में खटास की स्थितियों को सुधारने के लिए भारत जोड़ो यात्रा का अच्छा मौका मिला था। भारत जोड़ो यात्रा की कमान जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह के हाथ में ही थी। इस यात्रा में सात सितंबर 2022 से ही दिग्विजय सिंह राहुल गांधी के डे-टुडे के प्लान और दिन में यात्रा के दौरान अधिकांश समय साथ रहे और अब करीब 135 दिन में से 100 दिन से ज्यादा समय राहुल गांधी के साथ बिता चुके हैं।
यात्रा के दौरान भी चूक गए दिग्विजय
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी दिग्विजय सिंह से दो बड़ी चूक हुई जिससे हाईकमान को उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करना पड़ा। पहली चूक अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन पत्र लेकर भरने की जल्दबाजी करना। नामांकन पत्र भरने के लिए मध्य प्रदेश से विधायकों को भी बुलवा लिया गया था जबकि हाईकमान का प्लान कुछ और था। उस प्लान के बारे में हाईकमान से चर्चा किए बिना ही नामांकन पत्र भरने की कोशिश से उन्हें खुद पीछे हटना पड़ा था। अब दूसरी चूक उनसे सेना पर सवाल खड़े करके की है। सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर उन्होंने जो सवाल किए हैं, उसको लेकर हाईकमान एकदम पीछे हट गया है। पहले जयराम रमेश ने दिग्विजय के बयान उनकी व्यक्तिगत राय बताया। आज जब भाजपा के कांग्रेस से सवाल किए जाने लगे तो राहुल गांधी ने खुद बयान जारी कर दिग्विजय सिंह के बयान से अपने आपको असहमत बताया और कहा कि उनके बयान से न तो वे सहमत हैं और न ही कांग्रेस पार्टी उससे कोई इत्तफाक रखती है।
कमलनाथ को भी मौका मिला
दिग्विजय सिंह के बयान से जब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने खुद को पीछे हटा लिया तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ को एक और मौका मिल गया। मीडिया ने जब उनसे पूछा कि दिग्विजय सिंह के बयान टिप्पणी पूछी तो उन्होंने कहा कि इस बारे में दिग्विजय सिंह से ही पूछें। वे कांग्रेस पार्टी के साथ हैं और पार्टी कह चुकी है कि दिग्विजय का बयान उनकी व्यक्तिगत राय है तो वे भी पार्टी के साथ हैं।




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