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सामाजिक समीकरणों में उलझती राजनीति, कभी जनजाति तो कभी OBC-दलित तो कभी सवर्ण को साधते नेता
धर्म-जातिवाद को लेकर अक्सर विरोध के स्वर उठते रहते हैं लेकिन जब भी कहीं चुनाव आते हैं तो राजनीतिक दल इसके ईर्दगिर्द खुद को सिमट लेते हैं। इन दिनों मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही कुछ चल रहा है जिसमें भाजपा, कांग्रेस से काफी आगे चल रही है। उसने जातिवाद के साथ जनजातीय समाज की अपनी कमजोर कड़ी को मजबूती देने पर मैदानी रणनीति के साथ सरकार में होने का लाभ लेते हुए प्रशासनिक रूप से भी काम किया है। वहीं, कांग्रेस ने जनजातीय समाज के युवा वर्गों को साधने के लिए यूथ लीडरशिप को आगे कर दिया है जिससे भाजपा को टक्कर मिल रही है।
मध्य प्रदेश में चुनाव में चंद महीने ही बचे हैं और नई सरकार के लिए भाजपा-कांग्रेस के बीच घमासान शुरू हो गया है। भाजपा को केंद्र और राज्य में सरकारों के होने का लाभ मिल रहा है तो कांग्रेस राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से पार्टी नेताओं में आए जोश को बरकरार रखने के लिए हाथ से हाथ जोड़ो कार्यक्रम को लेकर काम में जुटी है। इस चुनावी वर्ष में इन दोनों ही प्रमुख दलों की राजनीतिक गतिविधियां प्रदेश में जातीय समीकरणों में उलझती दिखाई दे रही हैं।
भाजपा का जनजातीय प्रेम-कांग्रेस की युवा ब्रिगेड
भाजपा का जनजातीय प्रेम उमड़-घुमड़कर सामने आ रहा है। सीएम शिवराज सिंह चौहान पेसा एक्ट के बहाने जनजातीय समाज को भाजपा को उनकी हितैषी पार्टी बताने में जुटे हैं और वे उनके बीच सीधे पहुंच रहे हैं। जनजातीय समाज के गुमनाम चेहरों को भाजपा पहचान देने के नाम पर उनके परिवारों में पैठ करने की कोशिश कर रही है। रानी कमलापति से लेकर टंट्या मामा, शंकर शाह, रघुनाथ शाह जैसे लोगों की प्रतिमाएं, उनके नाम के यशोगान किए जाने के साथ कांग्रेस के शासन में उनकी उपेक्षा के आरोपों से निशाना साध रही है। मगर कांग्रेस अपने जनजातीय समाज के युवा नेतृत्व को आगे कर इस वर्ग के परिवारों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है। युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया से लेकर डॉ. हीरालाल अलावा, ओमकार मरकाम, बाला बच्चन जैसे नेताओं के सहारे जनजातीय क्षेत्र में पकड़ बनाकर रखने की कोशिश लगातार जारी है।
ओबीसी-सवर्ण समाज के सम्मेलन
जनजातीय समाज के साथ दोनों ही राजनीतिक दल अन्य वर्ग के लोगों को भी साधने में पीछे नहीं हैं। कांग्रेस ओबीसी वर्ग को साधने के लिए सतना में सम्मेलन कर रही है तो भाजपा सीएम हाउस में सवर्ण समाज के सक्षम व बड़े समूह राजपूत समाज को जुटाकर कार्यक्रम कर रहा है। ओबीसी वर्ग के नाम पर भाजपा अपने तीन सीएम के नाम गिनाकर इस वर्ग को अपने साथ करती रही है लेकिन कांग्रेस सबसे पहले ओबीसी को आरक्षण देने के दिग्विजय सरकार के कार्यकाल का हवाला देकर समाज को अपने साथ लेने की कोशिश करती रही है। इस बार कमलनाथ इस वर्ग के लोगों को साधकर विंध्य के अपने कमजोर गढ़ को मजबूत करने के लिए गए हैं।




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