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शिवराज सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बोलों का रहस्य, सरकार गिरने के बयान में छिपा क्या राज
ढाई साल पहले कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद अब उस समय की परिस्थितियों की परतें खुलने का समय आ गया है क्योंकि अब विधानसभा चुनाव 203 में समय बहुत कम बचा है। उस समय सरकार गिराने वाले विधायकों में शामिल मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने एक बयान से दो निशाने लगाए हैं। इससे यह कहा जा रहा है कि एक तो उन्होंने अपने भीतर के दर्द को निकाला है तो दूसरा कांग्रेस के भीतर चल रही गुटीय राजनीति में सेंधमारी की है।
कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के विश्वस्त शिवराज सरकार में भी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कमलनाथ सरकार के गिरने के कारण को लेकर जो बयान दिया है, उससे राजनीति गलियारों में हलचल मचा दी है। माधवराव सिंधिया से जुड़े रहने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का साथ निभा रहे गोविंद सिंह राजपूत कमलनाथ सरकार गिरने के बाद ढाई साल बाद यह रहस्य खोल रहे हैं कि अगर दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री होते तो कांग्रेस की सरकार गिरती ही नहीं।
निशाने पर कमलनाथ व कांग्रेस की गुटीय राजनीति
गोविंद सिंह राजपूत के इस बयान के पीछे यह माना जा रहा है कि उन्होंने सीधे तौर पर कमलनाथ को तब की परिस्थितियों में राजनीति कौशल से निर्णय नहीं लेने का जिम्मेदार बताया। तब की परिस्थितियों में दिग्विजय सिंह में सरकार बचाने की राजनीतिक कुशाग्रता बताकर राजपूत ने कमलनाथ के राजनीतिक अनुभव पर सवाल लगाने की कोशिश की है। जबकि कमलनाथ का 40 साल का राजनीतिक जीवन है जिसमें वे लगातार कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी रहे और यह माना जाता है कि उन्होंने कांग्रेस को कई बार विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, सिंधिया के करीबी होने के बाद भी दिग्विजय की तारीफ कर राजपूत ने क्या संदेश देने की कोशिश की है, यह अभी भी गूढ़ रहस्य बना है क्योंकि दिग्विजय सिंह-सिंधिया के कांग्रेस में रहते हुए कभी संबंध बहुत अच्छे नहीं रहे हैं।




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