विश्व हिंदी दिवस 2021 की पूर्व संध्या पर विश्वरंग कविता पाठ

टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य, कला एवं संगीत महोत्सव – विश्वरंग और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष आयोजन करने जा रहा है। इसके तहत विश्व हिंदी दिवसी की पूर्व संध्या पर कविता पाठ एवं संगीतमय कार्यक्रम का प्रसारण किया गया जिसमें विश्वरंग की खास झलकियां भी शामिल रहीं।

कविता पाठ करते हुए साहित्यकार संतोष चौबे ने पढ़ा दक्षिण से देखो हम मध्य में दिखेंगे, मध्य से देखो हम वाम में दिखेंगे, वाम से देखो हम होंगे अदृश्य, जब बनने लगेंगे अदृश्य तब मित्रों अपने चश्मे बदलिएगा…”, “आना जब मेरे अच्छे दिन हों…” को पढ़ा। वहीं, कवि लीलाधर मंडलोई ने “सिवाए प्यार के कोई हुनर नहीं सीखा…” एवं अन्य कविताएं पढ़ीं। कवि ऋतुराज ने कविता “ हमारी भाषा का सबसे निर्मम वाक्य है…” को पढ़ा। इस मौके पर वहीं कवीश सेठ द्वारा हिंदी भाषा को संगीतमयी प्रस्तुति के जरिए नमन किया गया। गौरतलब है कि इस विशेष अवसर पर 10 जनवरी को विश्वरंग का हिंदी भाषा को भावपूर्ण नमन कार्यक्रम का प्रसारण सुबह 10 बजे से विश्वरंग के फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पेज पर होगा। विश्वरंग हिंदी दिवस 2021 कैलेंडर का विमोचन दोपहर 3 बजे किया जाएगा। इस मौके पर भारतवासियों और विश्व के सभी हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और विश्वरंग – टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के निदेशक श्री संतोष चौबे ने कहा कि आज हिंदी के लिए बहुत बड़ा अवसर है जो पहले कभी नहीं रहा। आज वह तकनीक मौजूद है जिसकी मदद से हिंदी को वैश्विक स्तर पर विस्तार दिया जा सकता है। भारत भी आज विश्व में शक्तिशाली देश के रूप में उभर रहा है और दुनिया यहां व्यापार की संभावनाएं तलाश रही हैं। आज उनके लिए हिंदी सीखना आवश्यक है।

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