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संस्कृति विभाग एकाग्र श्रृंखला ‘गमक’ अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा कमलेश तिवारी और साथी, भोपाल का ध्रुपद गायन एवं सुश्री नेहा जैन और साथी, जबलपुर द्वारा ‘कथक नृत्य’ प्रस्तुति का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल- https://youtu.be/-pygKZZtlBw और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/220864596606252/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया|
प्रस्तुति की शुरुआत श्री कमलेश तिवारी द्वारा ‘ध्रुपद गायन’ से हुई जिसमें श्री कमलेश ने राग भूप में आलाप जोड़ झाला, इसके पश्चात शूल ताल में बंदिश प्रस्तुत की|
भारतीय सुर सिंगार संसद, मुंबई द्वारा वर्ष 2006 में सुरमणी की उपाधि से विभूषित श्री कमलेश तिवारी को बचपन से ही संगीत के प्रति गहरी रुचि थी। आपने प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद (उ. प्र.) से “संगीत प्रवीण” की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात् आपने डागर घराना के प्रसिद्ध धुपद गायक श्री उमाकान्त रमाकान्त गुन्देचा जी (गुन्देचा बन्धु) से गुरु शिष्य परम्परा के अन्तर्गत आठ वर्षों तक धुपद गायन की गहन शिक्षा प्राप्त की। अध्ययन काल में आपने गुरु गुन्देचा बन्धु के साथ देश की लगभग सभी महत्वपूर्ण संगीत सभाओं में भाग लिया तथा गुरु जी के साथ गायन प्रस्तुत किया| श्री कमलेश को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की अनेक छात्रवृत्तियाँ प्राप्त हैं|
दूसरी प्रस्तुति डॉ. नेहा जैन द्वारा ‘कथक नृत्य’ हुई जिसमें- सर्वप्रथम बिंदादीन महाराज द्वारा रचित शिव-पार्वती वन्दना में मध्य में गत के माध्यम से समुद्र मंथन वृतांत प्रस्तुत किया गया उसके बाद तीनताल में निबद्ध परंपरागत कथक में उठान, ठाठ, आमद, तोड़े, परन, तिहाई, कवित्त एवं ठुमरी पर भाव प्रदर्शन कर प्रस्तुति को विराम दिया|
प्रस्तुति में गीत के बोल सुश्री सरमिष्ठा के थे, तबला श्री लोकेश मालवीय, हारमोनियम श्री रमेश पुरी गोस्वामी एवं सारंगी वादन स्व. श्री संतोष मिश्रा का था




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