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जयपुर नहीं चीते नामीबिया से ग्वालियर आएंगे, फिर हेलीकॉप्टर से कूनो में उतरेंगे

70 साल पहले भारत की धरती से गायब हुए चीते आखिरकर शुक्रवार को सुबह नामीबिया से भारत के ह्रदयस्थल मध्य प्रदेश की ग्वालियर धरती पर उतरेंगे। यहां सुबह उन्हें लेकर विशेष विमान आठ बजे भारत की धरती को छुएगा और फिर इन्हें कूनो के राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से ले जाएगा।
छत्तीसगढ़ के पूर्व महाराज रामानुज शरण सिंहदेव के शिकार के शौक में सबसे तेज रफ्तार वाला चीता के भारत में खत्म हो गए थे। उनके हाथों 1947 में कोरिया के जंगल में तीन चीतों की शिकार में मौत हो गई थी और कहा जाता है कि उसके बाद ही भारत से चीता विलुप्त हो गए थे। 1952 में फिर भारत सरकार ने चीता को विलुप्त घोषित किया। पूर्व महाराज रामानुज शरण सिंहदेव की उस गलती को सुधारने के लिए अब भारत में चीतों का घर विकसित करने की दिखा में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।
नामीबिया से आज रात उड़ान भरेगा विशेष विमान
दक्षिण अफ्रीकी चीते भारत में अपना नया घर बनाने जा रहे हैं जिन्हें लेने विशेष विमान नामीबिया पहुंच गया है। आज रात यह विमान वहां से आठ चीते लेकर उड़ान भरेगा और लगातार 11 घंटे की उड़ान के बाद ग्वालियर में उतरेगा। यह विमान पहले जयपुर एयरपोर्ट पर उतरने वाला था लेकिन कतिपय कारणों से इस प्रोग्राम में आंशिक परिवर्तन किया गया है। ग्वालियर में नामीबिया से आ रहा विमान उतरेगा और चीतों को फिर हेलीकॉप्टर की सवारी कराई जाएगी। हेलीकॉप्टर से ये सभी कूनो पहुंचेंगे।
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