राज्य वन्य प्राणी सलाहकार बोर्ड के सदस्य रह चुके देश के वन्यजीव विशेषज्ञ वाल्मीकि थापर का कहना है कि चीता की मौत के लिए जेएस चौहान की गलती नहीं है। यहां का क्लाइमेट ही चीता के लिए सूटेबल नहीं है। यहां दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के मुकाबले भीषण गर्मी पड़ती है तो यहां ठंड भी यहां जीरो डिग्री तक पहुंच जाती है। यही कारण है कि कुनो में चीता के जीवित रहने पर संकट है। थापर का सुझाव है कि विश्व भर के एक्सपर्ट के साथ बैठकर चीता प्रोजेक्ट पर रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है।
कूनो में चीता की हो रही लगातार मौत के मुद्दे पर मंगलवार को वाल्मीकि थापर मोबाइल फोन पर हुई विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा कि चीता की मौत को लेकर फॉरेस्ट अधिकारियों को दोषी करार देना उचित नहीं है। इसके लिए कब तक फॉरेस्ट के अधिकारी और कर्मचारी दोषी ठहराए जाएंगे। बकौल थापर, ओबान चीता भी कॉलर आईडी के कारण घायल हुए हैं। बकौल थापर, एक चीता के पैर में दो जगह फैक्चर हैं। बातचीत के दौरान थापर ने बताया कि मैंने अपने किताब में चीता के 300 साल की हिस्ट्री का उल्लेख करते हुए लिखा है कि भारत में जंगली चीता नहीं थे। हां, यहां के राजा-महाराजाओं ने चीता को पालतू जानवर के रूप में रखते थे। वे इसे शिकार करने अपने साथ ले जाया करते थे और शिकार के बाद उन्हें मांस के टुकड़े खिलाते थे। इसके दांत भी कुत्ते के दांत से भी छोटे होते हैं। यह कभी भी आदमी पर हमला नहीं करता है। चीता प्रोजेक्ट का शुरू से विरोध किया थापर ने बताया कि उन्होंने चीता प्रोजेक्ट का शुरू में ही विरोध किया है लेकिन उनकी बात को तव्वजोह नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया में बड़े-बड़े घास के मैदान हैं, जो कि कूनो में नहीं है। थापर का कहना यह भी था कि कूनो में पथरीले और ऊपर-नीचे टीले हैं। उनका दावा है कि पथरीली और पत्थरों के टीले की वजह से एक चीता के पैर फैक्चर हो गया है। इस घटना को भी छिपाया जा रहा है। चीता के लिए रेडियो कॉलर भी बड़ी समस्या बनी हुई है। ओबान के गर्दन में कॉलर आईडी के कारण घायल है। थापर ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार दो फीमेल चीता भी इसकी चपेट में आ गई हैं। कीनिया-तंजानिया के विशेषज्ञों की मदद लेने की सलाह वन्य प्राणियों पर एक दर्जन से अधिक किताबें लिखने वाले वाल्मीकि थापर का कहना है कि चीता पर जो संक्रमण चल रहा है उसके के लिए दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया की बजाए कीनिया और तंजानिया के एक्सपर्ट को बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि वहां जंगली चीता पाए जाते हैं। इस बारे में उन्हें अधिक ज्यादा जानकारी है। उन्होंने यह भी कहा कि टास्क फोर्स में जिन लोगों को बतौर एक्सपर्ट शामिल किया गया है। उन्होंने कभी जंगली चीता देखा ही नहीं है। बार-बार ट्रेंकुलाइज करने की वजह से चीता आदमी के साथ क्लोज होते जा रहे हैं. वह कभी जंगली बन ही नहीं पाएंगे।
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