विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्रीमती अरूणा मोहन राव ने आज पुलिस मुख्यालय में दो दिवसीय महिला अपराध अनुसंधान कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल उन्नयन निरंतर होने वाली प्रक्रिया है। कानून में हो रहे परिवर्तनों से सुविज्ञ रहकर सही दृष्टिकोण के साथ विवेचना करें। महिला और बच्चों के विरूद्ध घटित अपराधों की प्रभावी रोकथाम के लिए जागरूकता का माहौल अपने कार्यक्षेत्र में बनाएं। मानव दुर्व्यपार के प्रकरणों के मूल में जाने का प्रयास करें। फॉरेंसिक साइंस तकनीक तथा सायबर तकनीक का ज्ञान तथा सदुपयोग अच्छे से करने की क्षमता विकसित करें ताकि अपराधी को सजा सुनिश्चित हो।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला अपराध) श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि महिला अपराधों में पीडि़त के प्रति पूरी संवेदनशीलता रखते हुए कार्य-व्यवहार करें। अनुसंधान बहुत ही सावधानी और विवेकशीलता के साथ करें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूरी तन्मयता से भागीदारी करें ताकि आपके कार्यों में और भी गुणवत्ता दिखाई दे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सौ से अधिक उपनिरीक्षक से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी सम्मिलित हुए हैं। प्रशिक्षण के प्रथम दिन सर्वोच्च्ा न्यायालय के एडवोकेट श्री अनंत कुमार अस्थाना ने कानूनी प्रावधान, यौन अपराध से संबंधित महत्वपूर्ण न्यायिक घोषणाएं, किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम-2015 प्रमुख प्रावधान, पास्को एक्ट के संबंध में, लोकअभियोजन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और निदेशक श्री अन्वेष मंगलम ने
जांच और अभियोजन के सामान्य दोष और पुलिस से जनता की अपेक्षा के संबंध में, पीपुल्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. आसमा रिजवान ने तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण स्थितियों में प्रभावी संचार और प्रबंधन के संबंध में तथा आरएफएसएल भोपाल के फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ए.के. सिंह ने यौन उत्पीड़न के मामलों में डीएनए का संग्रह और संरक्षण के संदर्भ में प्रशिक्षुओं को वर्चुअल जानकारी दी।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्रीमती अनुराधा शंकर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक महिला अपराध श्री शशिकांत शुक्ला, श्रीमती पिंकी जिवनानी, शालिनी दीक्षित सहित कर्मचारी उपस्थित थे।
Leave a Reply