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आदिवासी हमदर्द ये नेता, बैगा जनजाति की जमीन नेताजी की पत्नी के नाम नामांतरित
सत्ता पाने के लिए इन दिनों भाजपा और कांग्रेस की नजर इन दिनों आदिवासी वोट पर है लेकिन इनकी आदिवासियों के साथ हमदर्दी कैसी दिखावे की है, इसका उदाहरण शहडोल में सामने आया है। कांग्रेस के एक नेताजी ने आदिवासी समुदाय की विलुप्त जैसी स्थिति पहुंच चुकी बैगा जनजाति के एक परिवार की जमीन को अपने परिवार के नाम नामांतरित करा लिया है और इसका कुछ हिस्सा बेच भी दिया है। हम आपको बता रहे हैं इस मामले से जुड़े दस्तावेजों की कहानी।
शहडोल जिले के ग्राम कंचनपुर के आदिवासी बैगा जनजाति के सेमरहा के परिवार की यह कहानी है। सेमरहा के बेटे फागुना के नाम की दो अलग-अलग खातों की जमीन का यह मामला है। सेमरहा, उसके बेटे फागुना व फागुना की एक बेटी की मौत हो चुकी है तथा दो बेटे-बेटी अभी जीवित हैं। आदिवासी के नाम की इन जमीन में से एक जमीन का पिछले दिनों जब नामांतरण हुआ तो तब इस मामले का खुलासा हुआ। फागुना के नाम की एक जमीन को पिछले दिनों हेमलता-लक्ष्मण प्रसाद के बीच बंटवारा पत्रक बना तो यह सामने आया। कंचनपुर के पटवारी हल्का 57 के खसरा नंबर 1505-2 0.486 हैक्टेयर और खसरा 1506 की 0.247 हैक्टेयर जमीन का बंटवारा पत्र बना जिसमें विज्ञापन प्रकाशित करने के बाद कोई आपत्ति नहीं होना बताया गया। मगर फागुना बैगा की इस जमीन का विक्रय कब गुप्ता परिवार को हुआ, यह राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद पता चलेगा।
ये हैं हेमलता गुप्ता
हेमलता गुप्ता शहडोल के जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष गुप्ता की पत्नी हैं। गुप्ता को पिछले साल जिला कांग्रेस की जिम्मेदारी दी गई है। गौरतलब है कि आदिवासी की जमीन को बेचने और सामान्य जाति के व्यक्ति के नाम इसका राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो जाने में राजस्व अमले की मिलीभगत से आदिवासियों की जमीन को खुर्दबुर्द करने का गंभीर मामला है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले दिनों पेसा एक्ट के नियमों को लेकर जागरूक सम्मेलनों में आदिवासियों की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सामान्य वर्ग के लोगों द्वारा उनकी लड़कियों से शादी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान कर चुके हैं। मगर जमीनों के सौदागरों के इस फर्जीवाड़े पर अब कब कार्रवाई होगी और इसमें लिप्त नेता ही नहीं प्रशासन के अमले को कब सख्त सजा मिलेगी, यह देखना होगा।




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