श्रीकृष्ण से सम्बंधित लोकसंगीत-व्याख्यान केन्द्रित ‘ललित पर्व’

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, त्रिवेणी कला संग्रहालय, उज्जैन द्वारा श्रीकृष्ण से सम्बंधित आंचलिक लोकसंगीत और व्याख्यान केन्द्रित ‘ललित पर्व’ का प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफार्म http://bit.ly/culturempYT पर श्रीकृष्ण द्वारा गुरु सान्दीपनि से सीखी गई 64 कलाओं और 14 विद्याओं केन्द्रित चित्रप्रदर्शनी से हुआ| तत्पश्चात मध्यप्रदेश के लोकपरम्परा से निमाड़ी, मालवी, बघेली और बुंदेलखंड बोली के कृष्ण भक्ति गीत प्रसारित किये गए|

उसके पश्चात डॉ. कल्पना  द्विवेदी, मैनपुरी द्वारा श्रीकृष्ण द्वारा प्रतिपादित जीवन दृष्टि विषय पर अपना व्याख्यान आरम्भ किया, उन्होंने कहा आज से पाँच हजार दो सौ छियालीस वर्ष पूर्व सोलह कलाओं से पूर्ण भगवन श्रीकृष्ण का प्रातत्व हुआ| भगवन श्रीकृष्ण ने आदर्श समय-काल, परिस्थिति के अनुरूप आचरण करने को स्थापित किया, उन्होंने सर्वप्रथम कर्म का सिद्धांत बनाया| महाभारत काल में जब अर्जुन कुरुक्षेत्र में अपने परिजनों को अपने सामने देखते हैं तो व्याकुल हो उठते हैं, तब अर्जुन के सारथी बने श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म के पथ पर आगे बढ़ने के लिए न केवल प्रेरित किया अपितु उसे अपने गीता उपदेश से कर्म पथ पर आगे भी बढ़ाया|  डॉ. द्विवेदी ने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अन्य कथाओं को भी साझा किया|  

प्रस्तुति अंतर्गत 13 अगस्त, 2020 को श्रीकृष्ण द्वारा गुरु सान्दीपनि से सीखी गई 64 कलाओं और 14 विद्याओं केन्द्रित चित्रप्रदर्शनी और प्रदेश के मालवा, निमाड़, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड और चम्बल अंचल में गाये जाने वाले श्रीकृष्ण से सम्बंधित पारम्परिक लोकगीतों के साथ ही प्रो. भगवत शरण शुक्ल, वाराणसी द्वारा मानवीय सभ्यता और श्रीकृष्ण आधारित ‘व्याख्यान’ की प्रस्तुति होगी|  

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