विभिन्न सामाजिक संगठनों, समूहों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

मध्यप्रदेश में एक तरफ कोरोनाके हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। तो दूसरी तरफ सरकार के जिम्मेदार लोग जनता से दूरी बनाए हुए हैं। इस बीच सामाजिक संगठन और युवाओं के विभिन्न समूहों ने बिगड़े हालात को काबू में लाने की कई पहल की हैं। इसी कड़ी में सामाजिक संगठनों और समूहों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें जमीनी सुझाव और मांगें की गईं हैं।

पत्र में लिखा गया है कि विगत कुछ दिनों में प्रदेश में खासकर कुछ शहरों में कोरोना की स्थिति भयावह होती हुई दिखाई दे रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या के संक्रमण के नए केस रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। हालात यह हैं कि अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और जीवन रक्षक दवाइयों की कमी हो रही है। हम लोग संकट के इस समय में प्रदेश की जनता और सरकार के साथ हैं और अपने प्रयासों से लोगों को जितना संभव हो मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।
अपनी चिंताएं और चुनौतियां बताते हुए सामाजिक संगठनों और समूहों ने बिंदुवार लिखा है कि 
*1.* मरीजों को समय पर ऑक्सीजन और ऑक्सीजन बेड नहीं मिल पा रहे हैं.
*2.* अस्पतालों में जरूरत के मुताबिक बिस्तर, आईसीयू और वेंटीलेटर तथा परिवहन हेतु एम्बुलेंस की अनुपलब्धता है।
*3.* कोविद इलाज हेतु आवश्यक दवाओं और इंजेक्शन का अभाव और कालाबाजारी 
*4.* गंभीर मरीजों को देखने के लिए डाक्टरों की उपलब्धता नहीं होना 
*5.* प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी 
अपने अनुभवों के आधार पर सामाजिक संगठनों ने 12 मांग की हैं। जो इस तरह से हैं।
*1.*  स्वयंसेवकों और वोलेंटियरों का एक समूह तैयार किया जाए और उन्हें कोविद अस्पतालों के साथ सम्बद्ध किया जाए ताकि उस अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं की अद्यतन जानकारी मरीजों को परिजनों को मिल सके और उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो. 
*2.* इसी सप्ताह माननीय राज्यपाल महोदया के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में सुझाव प्रदान किया गया था कि प्रत्येक जिले में सर्वदलीय समिति बनाकर स्थितियों की निगारी और समीक्षा की जाए. माननीय राज्यपाल महोदया और मुख्यमंत्री जी इस सुझाव से सहमत हुए थे. इसलिए आग्रह है कि जिला स्तर पर बनाए गए क्राईसिस मेनेजमेंट ग्रुप में सभी राजनैतिक पार्टियो और सक्रिय सामाजिक संगठनों को शामिल किया जाए जिसकी सप्ताह में कम से कम एक बैठक हो. 
*3.* अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर आदि की उपलब्धता को लेकर सरकार ने एप और हेल्पलाइन आदि जारी की हैं लेकिन उन पर लोगों को विशेष मदद नही मिल पा रही है और कोई संतोषजनक जवाब नही मिल रहे हैं। इसलिये एक कॉमन हेल्पलाइन तुरंत चालू की जाए जिस पर आई हर शिकायत का निवारण करने की जिम्मेदारी सचिव स्तर के अधिकारियों की तय की जाए।
*4.* कोविद सम्बन्धी दवाओं की खरीदी के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए. हर दिन नियम न बदलें ताकि लोग परेशान न हों. 
*5.*  इंजेक्शन, दवाओं और बिस्तर आदि की कालाबाजारी करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और महामारी अधिनियम के अंतर्गत सख्त कार्यवाही की जाए. 
*6.* अस्पतालों में गैर कोविड गंभीर बीमारियों जैसे ह्रदय रोग, केंसर, टीबी, किडनी आदि के लिए अलग से सुविधा और आवाजाही सुनिश्चित की जाए. 
*7.* कोविड रोगियों में भी बच्चों, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए प्रथक से इंतजाम किए जाएँ. 
*8.*  इस तरह का पारदर्शी प्रबंधन तंत्र तैयार किया जाए ताकि ऐसा न हो कि कम गंभीर मरीज अस्पतालों में भर्ती हों और गंभीर मरीज के लिए स्थान न मिले. 
*9.* सभी उपयुक्त सुविधाओं को समाहित करते हुए शैक्षिक संस्थानों, होटलों, होस्टलों, शादी हॉल और धार्मिक स्थलों के परिसरों में नवीन कोविड सेंटर बनाए जाएँ. 
*10.* प्रत्येक वार्ड/ जोन को एक इकाई का दर्जा देते हुए कोशिश की जाए कि उस वार्ड हेतु आवश्यक अस्पताल सुविधाएं उसी वार्ड/ जोन में उपलब्ध हो सकें. इसके लिए वार्ड/ जोन स्तर पर अधिकारी को अधिकृत और जिम्मेवार बनाया जाए. अनुविभागीय अधिकारी के स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए. 
*11.*  प्रत्येक वार्ड के स्तर पर एक सहायता यूनिट बनाई जाए जो आम लोगों की जानकारी में हो और गंभीर प्रकरणों में लोग उसकी सहायता हासिल कर सकें. 
*12.*  हर वार्ड में टीकाकरण हेतु केम्प लगाए जाएँ जिसमे सभी आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाया जाए और बुजुर्गों को मोबाइल यूनिट के माध्यम से उनके घर जाकर टीका लगाया जाये. 

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