देबस्मिता की डूडल वर्कशॉप के नाम रहा बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का चौथा दिन

देश के प्रसिद्ध पेरेंटिंग यू ट्यूब चैनल गेट सेट पेरेंट विद पल्लवी द्वारा विश्व रंग
2020 के अंतर्गत आयोजित पहले बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव के चौथे देबस्मिता दास ने स्टोरीटेलिंग के नए अंदाज से सभी को अवगत कराया। उन्होंने सबसे पहले बाल महोत्सव के आयोजन के लिए गेट सेट पेरेंट और विश्वरंग का शुक्रिया अदा किया, जिसके जरिए उन्हें बच्चों से जुड़ने का मौका मिला। बहरा की कहानी के साथ उन्होंने स्टोरीटेलिंग की शुरुआत की।

बहारा एक लड़की है, जो अपने जन्मदिन पर बहुत खुश है और गिटार की मांग करती है। इसी बीच कोरोना के चलते लॉकडाउन लग जाता है और बहारा अपना जन्मदिन नहीं मना पाती। उसके पापा घर से ही काम कर रहे हैं और उसके पास कोई दोस्त नहीं है। उसके घर के लोग उसे मनाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद बहारा ऑनलाइन बर्थडे पार्टी की प्लानिंग करती है और उसके सभी दोस्तों को निमंत्रण भेज दिया जाता है। सभी मिलकर बहुत ही शानदार तरीके से बहारा का जन्मदिन मनाते हैं। सभी बहारा की बहुत तारीफ करते हैं।
बहारा की कहानी के बाद देबस्मिता ने मीना और मानसून की कहानी सुनाई। इसके बाद उन्होंने बच्चों को अजीन बनाना भी सिखाया। अजीन एक तरह की बुकलेट होती है। कोई भी किताब बनाने से पहले एक सैंपल किताब बनई जाती है, जिसे अजीन कहते हैं। अपनी खुद की किताब बनाने की दिशा में यह पहला कदम है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने एक बहुत ही खूबसूरत अजीन बनाकर दिखाया, जिसमें कई तरह की सीख भी छिपी हुई थी।
गीता रामानुजन की मजेदार कहानियों के साथ शुरू हुआ बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का चौथादिन
 शिक्षाप्रद कहानियों से लाभान्वित हुए बच्चे
 दैत्य और पेंटर की कहानियों से मिली जीवन की सीख
देश के प्रसिद्ध पेरेंटिंग यू ट्यूब चैनल गेट सेट पेरेंट विद पल्लवी द्वारा विश्व रंग 2020 के अंतर्गत आयोजित पहले बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का चौथा दिन गीता रामानुजन की मजेदार कहानियों के साथ शुरु हुआ। दिन के पहले सत्र में पल्लवीराव चतुर्वेदी ने गीता के साथ बातचीत की। गीता रामानुजन ने एक दुष्ट राक्षस की कहानी के साथ अपनी स्टोरीटेलिंग शुरू की। रंग बिरंगे कपड़ों में गीता रामानुजन ने बहुत ही मजेदार ढंग से राक्षस की कहानी सुनाई। इस कहानी में एक आदमी लोगों को कहानी सुनाते हुए घूमता रहता है। इसी कड़ी में वह युवक एक गांव में पहुंचता है जहां बच्चे रहते हैं लेकिन यहां दैत्य का राज है। जो इस गांव में राज करता है और किसी को हंसने गाने नहीं देता। वह हर शाम गांव में आता है और हंसने गाने वाले लोगों को अपने साथ ले जाता है।

गांव की हालत देखकर उस युवक ने राक्षस से मिलने का फैसला किया। राक्षस से मिलने के लिए वह युवक पहाड़ी के पार गया। यहां बहुत ही खूबसूरत घाटी थी जहां बहुत ही हरियाली थी और सभी बहुत खुश थे। युवक यहां पेड़ के नीचे बैठ गया। उसे नींद आने ही वाली थी तभी उसने किसी विशालकाय जानवर को अपनी तरफ आते देखा। उसे बहुत डर लग रहा था। उसने अपने बैग से शीशा निकाला और खुद को देखते हुए ढाढ़स बंधाने लगा। तभी राक्षस ने उसका गला दबाने की कोशिश की युवक चिल्लाया और अचानक वह दैत्य पीछे गिर पड़ा।
दैत्य मर चुका था। युवक वहां से वापस लौटा और उसने देखा कि सभी बच्चे उसका इंतजार कर रहे थे। युवक को देखते ही बच्चों ने फिर से गाना शुरू कर दिया। इसके बाद बच्चों ने उससे पूछा कि दैत्य मरा कैसे। इस पर युवक ने बताया कि दैत्य शीशे में खुद को देखकर इतना डर गया कि दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई।
कार्यक्रम में उन्होंने आगे बताया कि यह कहानी उनके निजी जीवन के अनुभवों से जुड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने इंगा नाम की एक आलसी लड़की कहानी भी सुनाई, जो अपना काम कभी नहीं करती थी। बाद में यह लड़की दूसरे घर जाती जहां सभी बच्चे अपने अपने कमरों में रहते थे और सभी अपना काम खुद करते थे। इंगा इसमें भी आलस करती थी और उसका रूम बहुत गंदा हो चुका था। इसके बाद उसके दादाजी ने जादूगर उसके हाथ में दिए जिसने उसका पूरा घर साफ कर दिया। इसके बाद इंगा भी सफाई के साथ रहने लगी।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने एक पेंटर की कहानी भी सुनाई, जिसने अपने नजरिए से सभी के जीवन में रंग भर दिए थे। राजीव पुलावर के कठपुरली शो के साथ खत्म हुआ बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का चौथा दिन

 हिरण और लड़के के पपेट देखकर रोमांचित हुए बच्चे
 राजीव ने सिखाया घर में ही बनाएं बेहतरीन पपेट बनाने का तरीका
भोपाल. 25 नवंबर 2020. देश के प्रसिद्ध पेरेंटिंग यू ट्यूब चैनल गेट सेट पेरेंट विद पल्लवी द्वारा विश्व रंग 2020 के अंतर्गत आयोजित पहले बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का चौथा दिन राजीव पुलावर के कठपुतली शो के साथ खत्म हुआ। केरल के जाने माने कठपुतली कलाकार राजीव पुलावर ने इस कार्यक्रम में कठपुतली शो बनाने का आसान तरीका बच्चों को समझाया। इस सत्र का संचालन भी पल्लवीराव चतुर्वेदी ने किया। शैडो पपेट शो शुरू करने से पहले राजीव ने विश्वरंग और गेट सेट पेरेंट का शुक्रिया भी अदा किया,
जिसके जरिए उन्हें बच्चों से जुड़ने का वैश्विक मंच मिला।
राजीव ने सबसे पहले एक हिरण के जरिए पपेट शो दिखाया। उन्हों बताया कि हथौड़ा और छेनी की मदद से पारंपारिक क्राफ्ट बनाया जाता है, पर आज के दौर में हम पेंसिल और चार्ट पेपर की मदद से यह काम करते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में ही उन्होंने हिरण का खूबसूरत पपेट बनाकर दिखाया। इस दौरान उन्होंने सिखाया कि कैसे टुकड़ों में हिरण का पपेट बनाया जाता है। हिरण को खबबसूरत बनाने के लिए उन्होंने वाटर कलर का इस्तेमाल भी किया।
हिरण के बाद राजीव ने एक लड़के का भी पपेट बनाया। लड़के का पपेट बनाने के बाद उन्होंने उसके सभी हाथ और पैर अलग करके उनको एक धागे के जरिए जोड़ा। धागे की बजाय यहां पर पिन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। धागे से जुड़ने के बाद लड़के के पपेट के हाथ और पैर हिलने लगे थे, जिसके बाद उन्होंने इसकी मदद से बेहतरीन पपेट शैडो शो किया और बच्चों को भी सिखाया कि कैसे आसानी से हम घर पर ही पपेट शो बना सकते हैं।

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