कोरोना संक्रमण रोकने में मप्र अन्य प्रांतों की अपेक्षा ज्यादा सफल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में एक जुलाई से डोर-टू- डोर स्वास्थ्य सर्वे के कार्य की जिलों में तैयारियाँ पूर्ण करें। सर्वे दल के गठन, उन्हें प्रशिक्षण और सर्वे कार्य के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाए। जिला कलेक्टर्स के साथ ही विभिन्न संभागों के लिए समीक्षा का दायित्व निभा रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सर्वे कार्य की तैयारियों को सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश में कोरोना नियंत्रण की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। कान्फ्रेंस के दौरान बताया गया कि प्रदेश में कोरोना का ग्रोथ रेट 1.46 प्रतिशत है जो अन्य प्रांतों से सबसे कम है। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में टेस्टिंग की सुविधाओं में वृद्धि, उपचार के लिए बिस्तर क्षमता बढ़ाने, सोशल डिस्टेसिंग के पालन और फीवर क्लीनिक के संचालन से वायरस को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। प्रदेश में कोरोना ग्रोथ रेट को कम करने के प्रयास सफल हुए है, जिसका मतलब है कि संक्रमण रोकने में मध्यप्रदेश ज्यादा सफल रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि कान्टेक्ट हिस्ट्री पर नजर रखने का कार्य लगातार होना चाहिए और पॉजीटिव रोगियों की संख्या भी कम होकर शून्य तक आना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय गोयल को निर्देश दिए कि प्रदेश में रोगियों के स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार हो और उन्हें रोग की गंभीर स्थिति से बचाने के पूरे प्रयास हों।

समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि प्रदेश में बुधवार को 6617 टेस्ट संपन्न हुए हैं। प्रदेश में उपलब्ध रोगी बिस्तर क्षमता का उपयोग भी कम हो रहा है। सामान्य बेड, आईसीयू बेड पर्याप्त हैं, जिनका प्रबंध संक्रमण बढ़ने की आशंका को ध्यान में रखकर किया गया था। इन्दौर जिले में 16 प्रतिशत जनरल वार्ड और 30 प्रतिशत आईसीयू वार्ड का उपयोग हो रहा है। भोपाल में मात्र 15 प्रतिशत आईसीयू वार्ड भरे हुए हैं। इन्दौर और भोपाल जिलों को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में औसतन जनरल बेड 9 प्रतिशत और आईसीयू बेड 6 प्रतिशत ही उपयोग में लाये जा रहे हैं। कुल 76.4 प्रतिशत रिकवरी रेट के साथ मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। भारत के बड़े प्रांतों में एक्टिव केस संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश की स्थिति काफी ठीक हुई है। इस समय मध्यप्रदेश 2441 एक्टिव केस के साथ 13वें नंबर पर है। मध्यप्रदेश का पॉजीविटी रेट देश के पॉजीविटी रेट 6.26 से काफी कम 3.92 प्रतिशत है। प्रदेश का डब्लिंग रेट 47.7 दिवस है जो अन्य बड़े राज्यों में ज्यादा है। इसका अर्थ है कि प्रदेश में संक्रमण की रफ्तार को कम करने में ज्यादा सफलता मिली है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने धार और जबलपुर जिलों की पृथक समीक्षा की। कोन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 47 जिलों में कम से कम एक एक्टिव केस और 23 जिलों में 10 से कम एक्टिव केस हैं। पांच जिलों में एक भी एक्टिव केस नहीं है। प्रदेश में अभी 1119 कन्टेनमेंट क्षेत्र हैं। इनमें 7.63 लाख आबादी निवासरत है। प्रदेश में करीब 9 हजार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कोविड-19 में दायित्व निर्वहन किया जा रहा है।

गेहूं और चने के लिए किसानों को मिला 25 हजार 855 करोड़ का भुगतान

प्रदेश में उपार्जित गेहूं और चने के लिए किसानों को राशि के भुगतान के कार्य की समीक्षा भी मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की। प्रमुख सचिव खाद्य श्री शिव शेखर शुक्ला और प्रमुख सचिव कृषि श्री अजीत केसरी ने प्रदेश में उपार्जित गेहूं और चने के परिवहन और सुरक्षित भंडारण की जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उपार्जित गेहूं और चने की राशि के भुगतान की जानकारी भी प्राप्त की। बताया गया कि प्रदेश में गेहूं के लिए किसानों के खाते में 23 हजार 455 करोड़ और चने के लिए 2 हजार 400 करोड़ अर्थात कुल 25 हजार 855 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

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