कृषि क़ानूनों के विरोध में राजधानी में निकली किसान ट्रैक्टर रैली

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में काले कृषि कानूनों के खिलाफ आज देशभर के किसानों के साथ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी भव्य ट्रैक्टर रैली निकाली गई। राजधानी के बाईपास स्थित मुबारकपुर जोड़ से निकली इस ट्रैक्टर रैली में सैकड़ों ट्रकटरों में तिरंगा झण्डा लगाए हुए किसान जब निकले तो नजारा देखते ही बनता था।

ट्रैक्टर रैली के समर्थन में राजधानी के विभिन्न संगठनों, जिसमें किसान संगठन मध्यप्रदेश किसान सभा, अखिल भारतीय किसान सभा, श्रमिक संगठन- सीटू, एटक, बीमा कर्मचारी यूनियन, महिला संगठन- जनवादी महिला समिति, सांस्कृतिक संगठन- जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, भारत ज्ञान विज्ञान समिति, छात्र संगठन एसएफआई, सामाजिक संगठन भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति, बीमा कर्मचारी यूनियन आदि के सैकड़ों कार्यकर्ता अपने दो पहिया और चार पहिया वाहनों में तिरंगा ध्वाज और अपने संगठनों के झंडों को लगाकर पूरे वातावरण को रंगीन कर दिये। किसान संघर्ष जिंदाबाद, मजदूर किसान एकता जिंदाबाद, काले कृषि कानून रद्द करों, एमएसपी पर गारंटी का कानून बनाओ आदि नारों से वातावरण को गुंजाते हुए जब यह रैली मुबारकपुर जोड़ से अचारपुरा जोड़, बैरसिया फ्लाईओवर होते हुए सूखी सेवनिया के जोड़ से वापस बेरसिया फ्लाईओवर तक आई तो सड़क के दोनों ओर ग्रामीण व शहरी आबादी, सड़क पर खड़े बस आदि में सवार यात्री बरबस ही इस आंदोलन से जुड़ गए और रैली के चित्र अपने मोबाईल पर उतारते दिखे। कई वाहन चालक स्वतःस्फूर्त ही रैली में शामिल हो गए।   

       बैरसिया फ्लाईओवर पर हुई एक आमसभा को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के इरफान जाफरी, मोहन भाई मीना, सीटू के प्रमोद प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रह्लाद बैरागी ने सभी को गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आज देश का किसान वास्तविक जनतंत्र दिवस माना रहा है। यह जनता का जनतंत्र है जो सत्ता में बैठे जनतंत्र की हत्या करने वालों को चेतावनी है। उन्होने कहा कि यह आंदोलन इन क़ानूनों की वापसी न होने तक चलेगा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में सत्ता पर बाथे मोदी-शाह और प्रदेश में शिवराज अंबानी-अदानी और बहुराष्ट्रीय कार्पोरेटों की चाकरी कर रहे है। देश के अन्नदाताओं को कार्पोरेटों का गुलाम बनाना हम कभी नहीं स्वीकारेंगे। वक्ताओं ने प्रदेश सरकार व राजधानी के प्रशासन को आगाह किया कि बेवजह किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर असंवैधानिक व जबरिया दमन करने से बाज आए।  रैली का नेतृत्व किसान नेता इरफान जाफरी, मोहन भाई, ठाकुर पवन सिंह, शंकर सिंह गूजर, योगेश पाल, मम्मू भाई (मोटे), जीवन मीणा, फ़ज़ल अली, बृंदावन शर्मा, विक्रम मीणा, संजीव साहू, लालाराम कुशवाह, श्रमिक नेता प्रमोद प्रधान, पीवी रामचंद्रन, एटी पद्मनाभन, पीएन वर्मा, पूषन भट्टाचार्य, एसएस मौर्य, रूपसिंह चौहान, नवाब भाई, लोकेन्द्र शेखावत, राम बिहारी, अंजनी पाठक, एमटी सुशीलन, मुकेश भदौरिया, ओपी डोंगरीवाल, महिला संगठन के नेता संध्या शैली, अरुणा, छात्र नेता कुलदीप, दीपक, लेखक संघ के नेता मनोज कुलकर्णी, सत्यम सागर, वीरेंद्र जैन, गैस पीड़ितों की नेता साधना प्रधान, विज्ञान कर्मी नेता पवन, छात्र नेता कुलदीप, दीपक आदि ने किया।      

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