हवलदार ने मृत मानसिक विक्षिप्त के 1800 किलोमीटर दूर रहने वाले परिजनों को तलाशा

तमिलनाडु के कोयम्बटूर से दो साल पहले मानसिक संतुलन खोने से गुम हुए एक व्य़क्ति भोपाल के बैरसिया आ गया। उसकी अचानक मौत हो गई तो शव को परिजनों को सौंपने के लिए हवलदार ने ऐसी सूझबूझ दिखाई कि भाषा समझ नहीं के बाद भी उसके परिजनों तक मृतक की जानकारी पहुंचाई। मृतक के परिजनों ने भोपाल पहुंचकर शव को लिया।

कुछ दिन से बैरसिया की सड़कों पर एक व्यक्ति घूम रहा था। वह तमिल तथा अंग्रेजी में बातचीत करता था। अचानक उसकी लाश जनपद पंचायत की दुकानों के पास पड़ी मिली तो हवलदार सागर सिंह पोस्टमार्टम के लिए ले गया। इस बीच उसने मृतक के परिजनों को तलाशने के प्रयास किए। उसे पता चला कि मृतक ने एक स्थानीय व्यक्ति के मोबाइल नंबर से कहीं बात की थी तो हवलदार ने उस व्यक्ति को तलाशा और उससे नंबर लेकर बात करना चाही। तमिल भाषा में सामने वाले व्यक्ति ने बात की तो सागर सिंह कुछ समझ नहीं पाया और फिर हवलदार ने तमिल भाषी की तलाश कर दोबारा उसी नंबर पर बात की। तमिल भाषी स्थानीय व्यक्ति ने संबंधित व्यक्ति को घटना के बारे में बताया और मृतक की तस्वीर भी बताई तो उन्होंने उसकी तस्दीक की। सागर सिंह ने पोस्टमार्टम के बाद शव को फ्रीजर में रखने की आ्वश्यकता पड़ने पर हमीदिया अस्पताल पहुंचाया और परिजनों के आने तक उसे वहां रखा।

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