संविधान से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाया जाये: जन-न्याय दल

देश के महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मांग की गई है कि देष में सर्व-धर्म समभाव लाने के लिये काॅग्रेस सरकार के द्वारा 42वें संविधान संषोधन से जोड़े गये समाजवाद व धर्मनिरपेक्ष शब्दों को पुनः संविधान संषोधन करके अब हटाया जाये।

राजनैतिक पार्टी जन-न्याय दल ने भेजे गये ज्ञापन में कहा है इन शब्दों का गलत अर्थ निकालकर जहाॅ काॅग्रेस ने कथित सेक्युलिरिज्म के नाम पर मुस्लिमों की एकमुष्त वोटों की खातिर तुष्टीकरण की नीति अपनाई है वहीं भाजपा की हिन्दुत्व राजनीति भी कथित सेकुलर या कम्युनिलिज्म की बदौलत ही जिंदा है। इससे देष का और हिन्दुओं का भारी नुकसान हो रहा है। ज्ञापन की प्रतियां देष के सभी सासंदों को भेजी गई हैं।
इस बात की जानकारी आज पत्रकारवार्ता में जन-न्याय दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट बृजबिहारी चैरसिया ने दी। पत्रकारों को उन्होंने आर.एस.एस. की हिन्दुत्व व राष्ट्रवादी वैचारिक सोच को देष की एकता और अखण्डता के लिय मील का पत्थर बताया। एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि आर.एस.एस. के द्वारा जनमानस में बनाये गये वैचारिक-धरातल के कारण ही आज काॅग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति त्यागकर हिन्दुत्व की राह पर चलने को मजबूर हुई है।
उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस के.टी. थाॅमस के उस बयान का स्वागत करती है जिसमें उन्होंने कहा है कि संविधान और सेनाओं के बाद आर.एस.एस. ने भारत के लोगों को सुरक्षित रखा। पत्रकारों के समक्ष उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि भले ही वह आर.एस.एस. के वैचारिक सोच का राजनैतिक मुखौटा बनकर सत्ताषीन हो गई है मगर अब उस सोच के विपरीत वह काॅग्रेस की कार्बन कापी बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि राममंदिर, गौरक्षा कानून, समान नागरिक संहिता, धारा 370, स्वदेषी जैसे मूलभूत मुद्धों भाजपा की कथनी और करनी अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है। जातिवादि पर पूछे गये सवाल पर उन्होंने जाति को भारतीय समाज की सच्चाई बताया।
उन्होंने राजनैतिक पार्टीयों पर आरोप लगाया कि वे अपने राजनैतिक नफा-नुकसान के आधार पर जातिवाद को परिभाषित कर रही है। उन्होंने एस.सी.,एस.टी. और ओ.बी.सी. वर्गो के संवैधानिक गठन का आधार सिर्फ जाति को बताते हुये देष के संसाधनों व अवसरों के वितरण को इन्हीं वर्गो की जनसंख्या के आधार पर करने की वकालत की। उन्होंने प्रदेष की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि शराब की बुराई को स्वीकार करने के बाद भी भाजपा प्रदेष में कानूनन शराबबंदी की दिषा में पहल न करके जन-अपराध कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे शराबबंदी ना कर पाने की अपनी लाचारी जनता के सामने रखे और कारण बतायें। उन्होंने काॅगेस के स्थानीय नेताओं से शराबबंदी की बात करने से पहले अपनी पार्टी पर इसके लिये नीतिगत निर्णय लेने का दबाब बनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार और कानून व्यवस्था के मामले में पिछले कुछ समय में मध्यप्रदेष में स्थिति काफी बिगड़ी है। ऐसे में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा पुलिस जन-संवाद कार्यक्रम के माध्यम से अगले तीन माह थाना स्तर पर जनता से जुड़ने की प्रक्रिया एक बेहतर कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी वर्ष 2018 के प्रदेष विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेकर अपनी लोकतांत्रिक भूमिका का निर्वहन करेगी। पार्टी की कार्यसमिति ने षिवराज सिंह ठाकुर को प्रभारी बनाकर छत्तीय सदस्यीय प्रदेष चुनाव संचालन समिति गठित कर दी है। उन्होंने बताया कि पार्टी अपनी चुनावी तैयारी विधानसभावार कर रही है। उनकी पार्टी चुनाव प्रचार के साथ ही विधानसभावार संसद से कानून बनाकर राम मंदिर व गौ हत्या रोकने के कानून बनाने और मध्यप्रदेष में कानूनन शराबबंदी के लिये जनता को संकल्पित करेगी जिसके लिये पार्टी ‘‘संकल्प-अभियान’’ जारी करने जा रही है।

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