लोहा कारोबारी 1600 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ़्तार

प्रदेश के बड़े लोहा कारोबारी तथा सोनी इस्पात लिमिटेड एंड मेटलमेन स्टील प्राइवेट लिमिटेड इंदौर के मालिक राजीव लोचन सोनी को सोमवार की सुबह जबलपुर स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया। राजीव पर 16सौ करोड़ रुपए की बैंक अदायगी बकाया है और इस मामले में ऋण वसूली अधिकरण (बीआरटी) से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।जानकारी के अनुसार राजीव लोचन सोनी तथा उसका भाई अनिल सोनी लोहे के पुराने कारोबारी हैं। सोनी स्पार्क तथा मेटलमेन स्टील प्राइवेट लिमिटेड पीथमपुर इंदौर के संचालक हैं। इन्होंने आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक, बैंक आॅफ बड़ोदा समेत करीब 14 बैंकों से 16 सौ करोड़ से अधिक का लोन ले रखा है। लोन की अदायगी न होने की स्थिति में बैंक द्वारा ऋण वसूली अधिकरण जबलपुर में मामले दायर किए गए हैं। जानकारों के अनुसार आईसीआईसीआई बैंक विरुद्ध सोनी स्पार्क एवं अन्य के मामले में वसूली अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। 7 जनवरी 2018 को एनके वर्मा वसूली अधिकारी द्वारा दीपक पचौरी को वारंट तामीली के लिए अधिकृत किया गया। बताया गया है कि जैसे ही राजीव सोनी इंदौर-जबलपुर ओवर नाइट एक्सप्रेस से जबलपुर के लिए रवाना हुआ वैसे ही ऋण वसूली टीम को जानकारी लग गई।

ऋण वसूली टीम ने नरसिंहपुर के पास से ही राजीव को ट्रेन में नजरबंद कर लिया। मामले में अति गोपनीयता बरती गई और उसकी जानकारी सिर्फ आरपीएफ को दी गई। जबलपुर स्टेशन पर ओवर नाइट एक्सप्रेस के पहुंचते ही राजीव को दबोच लिया गया। बताया जाता है कि वसूली टीम का नेतृत्व कर रहे दीपक पचौरी ने रेलवे प्लेटफार्म क्रमांक 6 पर स्थित होटल पोलो मैक्स में 2 कमरे भी बुक करा लिए थे। होटल की बुकिंग के दौरान जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया। गिरफ्तारी के बाद आरपीएफ दस्ते की मौजूदगी में राजीव को होटल लाया गया जहां काफी देर तक पूछताछ करते हुए महत्वपूर्ण जानकारियां ली गर्इं।

बताया जाता है कि राजीव सोनी को गिरफ्तारी के बाद डीआरटी में पेश किया गया यहां से उसे एक माह के लिए जेल भेजने के आदेश पारित कर दिए गए। बताया जाता है कि राजीव सोनी तथा उसके भाई की दोनों कंपनियों पर लगभग 16 से 18सौ करोड़ रुपए की देनदारी बाकी है। इन मामलों में वे डिफाल्टर हैं और लंबे समय से अलग-अलग बैंकों से कई मामले डीआरटी के अलावा अन्य सक्षम न्यायालयों में विचाराधीन हैं। इन्हीं मामलों के चलते तथा जारी वारंट रुकवाने अग्रिम जमानत की कोशिश में राजीव लगा हुआ था। जबलपुर आकर वकीलों से मुलाकात का कार्यक्रम निश्चित था। लेकिन इसके पहले ही उसे दबोच लिया गया।

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