लोकरंग के चौथे दिन हुईं लोकजनपदीय और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

घुंघरुओं की झंकार, ढोलक की थाप और सामूहिक रूप से एक ही स्वर-ताल में नृत्य करते कलाकार ये दृश्य है, संस्कृति विभाग की ओर से हर वर्ष आयोजित होने वाले पाँच दिवसीय प्रतिष्ठा समारोह लोकरंग का| जहाँ अलग – अलग राज्यों से आए हुए कलाकारों ने एक ही मंच पर अपनी संस्कृति और लोकपरंपरा की झलक भोपालवासियों को दिखलायी।बीएचईएल दशहरा मैदान में चल रहे “लोकरंग” उत्त्सव में प्रतिदिन जनसमान्य के लिए कई सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं आज 29 जनवरी को मेला प्रांगण में बच्चों के लिए आयोजित उल्लास श्रृंखला के तीसरे और समापन दिवस आज हिमांशु बाजपेयी और अंकित चड्ढा के द्वारा प्रस्तुत ‘दास्तान टोलबूथ की’ का बच्चों ने ताली बजाकर स्वागत किया। उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया और जो हौसलेमन्द और हुनर के पक्के बच्चों की बात कहता है। मंच पर दोनों ही प्रस्तुतकर्ताओं ने परस्पर एक-दूसरे की बात को आगे विस्तार देते हुए ऐसी रोचक कथा कही कि बच्चे ध्यानपूर्वक उसे सुनते रहे। उसके पश्चात मिट्टी शिल्पकार देवीलाल पाटीदार ने बच्चों को मिट्टी के खिलौने और आकार गढ़ने में मार्गदर्शन प्रदान किया। बच्चों से उन्होंने कहा कि एक लड्डू बराबर मिट्टी हाथ में लेकर जो मन कहे वो आकार गढ़ो। उन्होंने बच्चों को इस बात के लिए भी प्रेरित किया कि उतनी ही मिट्टी में आकृति बनाओ, बिना अतिरिक्त मिट्टी लगाये। बच्चों ने इस तरह से सुन्दर-सुन्दर शिल्प बनाये, छोटे छोटे आकार गढ़े। पाटीदार स्वयं भी बच्चों के पास जा जाकर उनको सुझाते रहे। इसी प्रकार कार्तिक शर्मा ने कागज के खिलौने बनाने की विधि बतलाकर और प्रेरित कर बच्चों से तरह तरह के काम कराये। बच्चों ने इस हुनर को भी खूब रुचि लेकर सीखा। आज भी लगभग 200 से ज्यादा बच्चे, उनके अविभावक और शिक्षक उपस्थित रहे।

बाह्य मंच पर आशा भारती द्वारा बुन्देली लोक गायन प्रस्तुत किया गया, जिसमें गणेश वंदना, देवी भजन और विवाह गीत प्रस्तुत किये गये|वहीं मालवा अंचल के संस्कार लोकगीतों की प्रस्तुति श्रीमती शालिनी व्यास, श्रीमती मंगला उपाध्याय और श्रीमती माधवी जोशी द्वारा दी गई| मालवी लोकगीतों में गणेश स्तुति, बधावा, बन्ना, भेरू जी, मामेरा और मेला गीत प्रस्तुत किये गये| मूलतः नागौर (राजस्थान) के कलाकार लक्ष्मण भारती (भोपाल) ने “अमर सिंह राठौर” और “झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई” सहित अन्य कहानियां सहित राजस्थान की कठपुतली नृत्य दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।

प्रतिदिन शाम 7 बजे से शुरू मुख्य मंच की गतिविधियों धरोहर और देशांतर के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां  हुईं |मध्यप्रदेश के गणगौर नृत्य की प्रस्तुति से आज धरोहर का शुभारंभ हुआ|इसके पश्चात जम्मू-कश्मीर के पारंपरिक डोगरी नृत्य को कलाकारों के लोकरंग के मंच पर प्रस्तुत किया| छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने मांदर और झांझ-मंजीरा, घुंघरू, टिमकी ढोल, मोहरी  जैसे वाद्य यंत्रो की धुन पर लोक माँगलिक नृत्य “करमा” की प्रस्तुति दी| तमिलनाडु से आए कलाकारों द्वारा धार्मिक एवं कलात्मक नृत्य “पिकॉक नृत्य” की प्रस्तुति मंच पर दी गयी| यह नृत्य विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है,  इस नृत्य में कलाकार मोर की तरह ही वेशभूषा पहनती है|तमिलनाडु के कलाकारों द्वारा “डमी हार्स” की प्रस्तुति भी मंच पर दी गई| पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित कलाकारों ने झारखंड के पारम्परिक वाद्ययंत्रो की धुन पर एक ताल और लय में लोक नृत्य “मर्दानी झूमर” एवं “करमा” नृत्य की प्रस्तुति दे कर समारोह में आए लोगों को मंत्र मुग्ध किया। मंच पर महाराष्ट्र के कलाकारों ने ‘लिंगो नृत्य’ और ‘धन गरीगज़ा’ की प्रस्तुति दी| “देशांतर” के अंतर्गत आज अफ़्रीकी संगीत की धुन पर कलाकारों ने पारम्परिक नृत्य “अफ़्रीकन एक्रोबेट” एवं रूस के कलाकारों द्वारा “समादन और केंडेलेब्रा” नृत्य की प्रस्तुति देकर, नृत्य में सौंदर्य और सामंजस्य का ख़ूबसूरती के साथ मंच पर प्रदर्शन किया।

मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा गणतंत्र के लोक उत्सव के रूप में आयोजित “लोकरंग” समारोह में 26 जनवरी से 30 जनवरी 2018 तक बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शिल्प मेला और बाह्य परिसर में विभिन्न गतिविधियाँ और प्रदर्शनियाँ जन सामान्य के लिए खुली रहेंगी| सायं 7 बजे से मुख्य मंच पर मध्यप्रदेश, देश और अन्य देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी|

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