नाटक ‘काहिलों की जमात’ का मंचन

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नवीन रंगप्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखलाअभिनयनमें परवेज खान के निर्देशन में नाटक काहिलों की जमातका मंचन संग्रहालय सभागार में हुआ|नाटक काहिलों की जमात असल में हास्य परिपाटी पर तैयार नाटक है| नाटक के केंद्र में दो पात्र हैं,आबिद और अकबर, जिन्हें लिखने का शौक है और वो शहर के मशहूर शायर अलालबादी के शागिर्द हैं| आबिद और अकबर से जब भी कोई पूछता है कि आप काम क्या करते हैं तो इनका जवाब होता हैहम लिखना सिख रहे हैं| इस पर लोग इन्हें ताना मारते हैं और कहते हैं, भला ये भी कोई काम हुआ| आबिद और अकबर अक्सर चच्चा  की चाय की दुकान पर मिलते थे| उधर चच्चा इनकी रोज-रोज लम्बी-लम्बी बातें सुन कर थक चुके थे| अतः वह उन्हें अपनी जमात बनाने का परामर्श देते हैं|दारुल कोहला के उसूलों पर काहिलों की जमात की बुनियाद रख दी जाती है| जैसे-जैसे समय गुजरता है लोगों को अहसास होता है कि ये जो काहिल थे, अब वह ही सबसे ज्यादा काबिल हो गए हैं| इसी के साथ नाटक काहिलों की जमात का अंत होता है|                

 

 

नाटक के दौरान मंच पर अतुल अग्निहोत्री, आबिद मो खान, दीपक किरार, अदनान खान, देवेंद्र सिंह नाईक, अलताफ, उमेश राय, अर्शीन खान, शिवम चौरसियाअभिषेक शास्त्री, गौरव, देवांशू, अमन, शाहवर उद्दीन, विनय ठाकुर आदि ने अपने अभिनय से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया| इस नाटक में मंच व्यवस्था में सावन मिश्रा ने, मंच नियंत्रण में दिव्यांश सिंह सेंगर ने, सहयोग में देवेंद्र, राहुल, अमन और शुभम ने मंच परिकल्पना में डॉ. नाहिद तनवीर, मंच सामग्री में अतुल, अर्शीन, देवांशू और विनय ने, प्रचार-प्रसार आबिद मोहम्मद खान ने, वेशभूषा में शिवांगी सिंह भदौरिया और प्रिय साहू,रूपसज्जा में प्रभात राज निगम ने, गीत गायन में अजय श्रीवास्तव, अज्जू, विशाल चतुर्वेदी और दिव्यांश सिंह सेंगर ने, प्रकाश परिकल्पना में उज्जवल सिन्हा ने सहयोग किया| इस नाटक का लेखन अब्दुल हक़ ने और निर्देशन परवेज खान ने किया है| परवेज खानकई लगभग दस वर्षों से रंग कर्म के क्षेत्र से जुड़े हैं| इन्होंने कई नाटकों में अभिनय करने के साथ ही साथ कई नाटकों का निर्देशन भी किया है|

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