कैग तकनीक से मिलेगा भरपूर मछली उत्पादन

सिवनी जिले में तीन आदिवासी मछुआ सहकारी समितियों बिजना छपारा, डूंगरिया लखनादौन और गुर्दा नाला को उनके उपलब्ध तालाब के आधार पर चयनित कर कैग मत्स्य पालन योजना से लाभान्वित किया गया है। आदिवासी विकास परियोजना योजनान्तर्गत मत्स्य विभाग द्वारा प्रति सहकारी समिति 18 लाख रूपए से कैग को तालाबों में स्थापित किया गया है। इसमें विशिष्ट प्रजाति की पंगेसियस मछलियों का पालन किया जा रहा है इस नवीन तकनीक से मछुआरों को आधे समय अर्थात् 5 माह की अवधि में ही अच्छा उत्पादन मिलेगा। इससे इन आदिवासी सहकारी समितियों के सदस्यों की आय में अप्रत्याशित वृद्धि होगी। डूंगरिया आदिवासी मछुआ समिति के अध्यक्ष रमेश धुर्वें बताते हैं कि कैग प्रणाली से मत्स्य पालन की लागत बहुत कम हो गयी है। इस नवीन तकनीक से समिति के सदस्यों को कैग स्थापना उपरांत सिर्फ आहार का ही ध्यान रखना पड़ता है। कैग प्रणाली से अब मौसम एवं बीमारी का प्रकोप बहुत कम हो गया है। इसके साथ ही मत्स्य विभाग की सलाह से कम ऑक्सीजन में भी जीवित रह सकने वाली विशेष प्रकार की मत्स्य प्रजाति ‘पंगेसियस’ के पालन से उन्हें अन्य मत्स्य प्रजाति से अधिक उत्पादन मिलने का अनुमान है। इस समिति के सभी सदस्य छोटे कृषक हैं और किसानी के अलावा जीवनयापन के लिए मत्स्य पालन कर अतिरिक्त आय प्राप्त करते हैं। इस नवीन तकनीक से इन्हें अच्छी आमदनी की आशा है। मत्स्य विभाग के अनुमान अनुसार इस वर्ष प्रत्येक समिति को आगामी 3 माह में पहले से लगभग 4 टन अधिक मछली उत्पादन मिलेगा। इससे उन्हें 4 से 5 लाख रूपये तक की अतिरिक्त आय होगी। कैग तकनीक से पंगेसियस प्रजाति की मछली का भरपूर उत्पादन मत्स्य पालकों के लिये लाभकारी नवाचार साबित हो रहा है। 

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