आजीविका मिशन की कृषि सखी प्रीति बनी प्रगतिशील किसान

सागर जिले के देवरी विकासखण्ड के ग्राम खेरूआ की श्रीमती प्रीति आठ्या प्रगति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। बकौल प्रीति वो आज 2 लाख रुपये से अधिक की सालाना आमदनी प्राप्त कर रही हैं। उन्होने 4 कमरों का पक्का मकान और घरेलू विस्तार के लिये बोरिंग कराने का काम लगाया है।

प्रीति के घर में 4 एकड़ असिंचित जमीन थी, जिसमें परंपरागत तकनीक से सोयाबीन, चना और मसूर की खेती होती थी। घर के आठ सदस्यों का पेट भरने का एकमात्र जरिया यही खेती थी। प्रीति ने आजीविका मिशन से जुड़ने पर कृषि सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण में उन्हे खेती में कम लागत से अधिक उत्पादन लेने की तकनीक की जानकारी मिली। इस जानकारी का पहला प्रयोग उन्होने अपने ही घर की खेती को सुधारने में किया।प्रीति को पहले खेती से प्राप्त आमदनी घर चलाने के लिये पूरी नहीं पड़ती थी। इस कारण घर के वयस्क सदस्यों के साथ मिलकर मजदूरी भी करती थी। प्रीति ने 9 हजार रूपये समूह से उधार लिये और अपने 4 एकड़ खेत के साथ-साथ अधिया पर 2 एकड़ जमीन लेकर सोयाबीन लगाया। सोयाबीन से उन्हे 50 हजार रूपये की आमदनी हुई। उन्होने अपने खेत में इस लागत से कुआं खुदवाना शुरू कर दिया और पहली बार लहसुन और प्याज लगाया। अकेले लहसुन से उन्हे 2,50,000 रूपये प्राप्त हुए। बाकी फसलों ने उनको मजदूरी से छुटकारा दिलवा दिया है।प्रीति को पहली बार घर में इतनी बड़ी रकम फसलों को बेचकर प्राप्त हुई, तो घर के सभी सदस्य उत्साहित थे। घर के लोगों ने प्रीति की सलाह पर 8 एकड़ रकबे में (4 एकड़ अधिया) सब्जी की खेती शुरू की। प्रीति को आजीविका मिशन से उन्नत खेती के गुर प्राप्त हो गये थे, जिनको अपनाकर उसने अपने परिवार का जीवन बदल दिया है।प्रीति का परिवार आज बहुत खुशहाल है। प्रीति ने खेती में अपनाये तरीकों को कृषि सखी के रूप में अपने गांव के अलावा आस-पास के बाडी, विछुआ, पथरिया, खैरीपदम, पिपरिया, रसेना, सगरा, सिमरिया, बिजौरा के महिला स्व-सहायता समूहों में जाकर बताना शुरू किया है। समूह की महिलाओं को उसने भूमिगत नाडेप, मडका दवा, जिव्रलिक एसिड, बहु-फसली तकनीक बताई है। स्वयं महिलाओं की मदद से प्रदर्शन प्लॉट बनाये, पोषण वाटिकायें, श्रीविधि से गेंहू, हल्दी की खेती शुरू की। इससे उनके गांव के अलावा कई गावं के लोग उन्हे व्यक्तिगत रूप से कृषि का जानकार मानने लगे हैं। प्रीति ने अपने गांव के अलावा आसपास के 60 एकड़ में प्याज और लहसुन की खेती की शुरूआत की है और समूह की महिलाओं को लाभ की फसल से जोड़ा है।

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